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बदलता मौसम और तापमान में लगातार उतार-चà¥à¤¾à¤µ सामानà¥à¤¯ तौर पर शरीर के लिठदिकà¥à¤•तें पैदा करता है। उसपर आजकल कà¤à¥€ à¤à¥€ होने वाली बारिश सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को और à¤à¥€ चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ से à¤à¤°à¤¾ बना देती है। वयसà¥à¤•ों के लिठही यह मौसम कई शारीरिक समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं की वजह बन सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर तो इसका असर और à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो सकता है। 0-6 साल की उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‡ जो इस तरह के मौसम का पहली बार सामना कर रहे होते हैं, उनका खास खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना जरूरी होता है। अकà¥à¤¸à¤° माता-पिता यह समठनहीं पाते कि ठंड के मौसम में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को किस तरह के कपड़े पहनाठरखे जाने चाहिà¤à¥¤ वे या तो बहà¥à¤¤ सारे कपड़े पहना देते हैं या फिर कई बार सामानà¥à¤¯ पतले कपड़ों में ही बचà¥à¤šà¥‡ को रहने देते हैं। ये दोनों ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ के हिसाब से मà¥à¤¶à¥à¤•िल खड़ी कर सकती हैं। जनà¥à¤® के पहले बचà¥à¤šà¤¾ माठके à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤• सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और आरामदायक कवच में रहता है। नौ महीने तक यही उसकी आदत में होता है। जब वह बाहर आता है तो उसके लिठसबसे बड़ी चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ ही बाहर के वातावरण से सामंजसà¥à¤¯ बैठाने की होती है। उसका शरीर धीरे-धीरे इस बाहरी वातावरण को अडॉपà¥à¤Ÿ करता है। इसलिठजनà¥à¤® से कम से कम 6 माह तक बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इस मौसम में सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखना जरूरी है। आइठजानें कैसे।
ठंडी और रूखी हवा, रात में और सà¥à¤¬à¤¹ अचानक तापमान का गिरना, दिन की तीखी धूप और अचानक हो जाने वाली बारिश। ये सब कà¥à¤› सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में हो सकता है और पिछले कà¥à¤› सालों में तो मौसम का यह बदलाव और à¤à¥€ तीवà¥à¤° हो गया है। आजकल जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° पैरेंटà¥à¤¸ सिंगल फैमिली के रूप में रहते हैं à¤à¤¸à¥‡ में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ असरदार पारंपरिक नà¥à¤¸à¥à¤–े बताने वाला à¤à¥€ कोई नही होता। उसपर छोटे से बचà¥à¤šà¥‡ और उसकी देखà¤à¤¾à¤² को लेकर पहले ही उनके मन में कई सवाल चल रहे होते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में कà¥à¤› बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना मददगार साबित हो सकता है।
ठंड के मौसम में केवल सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम ही नहीं है जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को परेशान कर सकता है। इसके अलावा बà¥à¤–ार, उलà¥à¤Ÿà¥€, दसà¥à¤¤, सà¥à¤•िन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ या रैशेज और फà¥à¤‚सियां, पेट दरà¥à¤¦, डà¥à¤°à¤¾à¤¯ कफ, डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨, निमोनिया, वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ और कà¥à¤› मामलों में सडन इनà¥à¤«à¥‡à¤‚ट डेथ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® के शिकार à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ हो सकते हैं। सडन इनà¥à¤«à¥‡à¤‚ट डेथ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कपड़े में बचà¥à¤šà¥‡ को लाद देने से हो सकती है। इसके अलावा शरीर के टेमà¥à¤ªà¤°à¥‡à¤šà¤° का à¤à¤•दम घट जाना यानी हाइपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ बन सकती है। कई बार बहà¥à¤¤ तेज धूप बचà¥à¤šà¥‡ को सूरज की हानिकारक किरणों से होने वाले नà¥à¤•सान à¤à¥€ दे सकती है। इसके अलावा घर में गरà¥à¤®à¥€ के लिठअपनाठगठआरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤² साधन जैसे हीटर या सिगड़ी आदि के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोग से à¤à¥€ तकलीफ हो सकती है।
सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में रखें बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का खास खà¥à¤¯à¤¾à¤²
ठंड से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का बचाव करने का सबसे आम तरीका होता है ढेर सारे गरà¥à¤® कपड़े बचà¥à¤šà¥‡ को पहना देना। साधारण कपड़ों के ऊपर गरà¥à¤® या ऊनी कपड़े, टोपी, मोजे और कà¥à¤› मामलों में तो डबल मोजे, बचà¥à¤šà¥‡ को पहना दिठजाते हैं। गरà¥à¤® कपड़े सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखते हैं लेकिन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कपड़े उसके लिठदिकà¥à¤•त बीबी पैदा कर सकते हैं। जरूरी यह है कि बचà¥à¤šà¥‡ के लिठकपड़ो की सही लेयर के साथ उसकी नियमित पोषक खà¥à¤°à¤¾à¤• और मालिश आदि जैसी सà¤à¥€ चीजों को à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखा जाà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‡ को कड़क और चà¥à¤à¤¨à¥‡ वाले कपड़ों की जगह नरम कपड़ों की तीन लेयर पहनाà¤à¤‚। इसमें बनियान या शमीज जैसा कोई कपड़ा, à¤à¤• पूरी बांहों का कोई टीशरà¥à¤Ÿ या ऊपरी कपड़ा और à¤à¤• सॉफà¥à¤Ÿ पजामा या जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठंड हो तो वारà¥à¤®à¤° और à¤à¤• सà¥à¤µà¥‡à¤Ÿà¤° पहनाà¤à¤‚। दिन में और रात में सोते समय हलà¥à¤•े कपड़े ही पहने रहने दें। सà¥à¤µà¥‡à¤Ÿà¤° और मोजे, टोपी आदि उतार दें। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यदि बचà¥à¤šà¥‡ को पसीना आयेगा तो उसमें ठंडी हवा लगना तकलीफ दे सकता है। कोशिश करें कि बचà¥à¤šà¥‡ को मचà¥à¤›à¤°à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ में ही सà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚। इससे मचà¥à¤›à¤° और ठंड दोनो से उसका बचाव हो सकेगा। जब आप बचà¥à¤šà¥‡ को घर से बाहर ले जाà¤à¤‚ तो कार में à¤à¥€ तेज हीटर न चलाà¤à¤‚। अगर बाहर तेज ठंड है तो बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤µà¥‡à¤Ÿà¤°, टोपी, मोजे आदि पहनाà¤à¤‚। ठंडी हवा में खासकर बचà¥à¤šà¥‡ का सिर, मà¥à¤‚ह, नाक और छाती ढंकी रहे यह धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इस मौसम में ऊनी या सिंथेटिक कपड़ों से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ à¤à¥€ हो सकती है, इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें और कपड़ों को धोते समय बहà¥à¤¤ साबà¥à¤¨ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न करें।
तमाम सावधानियों के बावजूद कई बार बचà¥à¤šà¥‡ पर मौसम का असर हो सकता है या किसी और से बचà¥à¤šà¥‡ तक संकà¥à¤°à¤®à¤£ आ सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम होने पर à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ देते रहें। इसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह लें। माठका दूध इस समय à¤à¥€ जारी रखा जा सकता है। छह महीने के बचà¥à¤šà¥‡ को तो आप दाल का पानी या मैश किये हà¥à¤ फल आदि à¤à¥€ दे सकते हैं। अगर कोई फॉरà¥à¤®à¥à¤¯à¥à¤²à¤¾ यूज़ कर रहे हैं तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह जरूर लें।
-हीटर जैसे किसी à¤à¥€ साधन का उपयोग बहà¥à¤¤ जरूरी होने पर ही करें।
-बचà¥à¤šà¥‡ के सिर सहित पूरे शरीर की हलके हाथों से की गई मालिश उसकी सà¥à¤•िन को मॉइशà¥à¤šà¤° से à¤à¤°à¤ªà¥‚र रखती है। साथ ही बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ को à¤à¥€ सही रखती है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ को नींद à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ आती है और उसका पूरा विकास होता है। मालिश के बाद कà¥à¤› देर बचà¥à¤šà¥‡ को हलà¥à¤•ी धूप में जरूर ले जाà¤à¤‚। इसके बाद साबà¥à¤¨ रहित गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी से नहला दें। मालिश के लिठइस मौसम में सरसों का तेल सबसे अचà¥à¤›à¤¾ होता है। इसके अलावा आप जैतून या बादाम का तेल à¤à¥€ चà¥à¤¨ सकते हैं।
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